हमीरपुर में युवाओं व सीटू नेताओं के दमन के खिलाफ शिमला में सीटू कार्यकर्ताओं का हल्लाबोल प्रर्दशन

सीटू राज्य कमेटी ने आर्मी भर्ती,अग्निपथ योजना के ज़रिए चार साल के लिए सेना में अग्निवीर की नियुक्ति आदि मुद्दों पर आंदोलनरत युवाओं व सीटू नेताओं डॉ कश्मीर ठाकुर,जोगिंद्र कुमार व सुरेश राठौर के साथ हमीरपुर पुलिस द्वारा दमन व गिरफ्तारी के कदम की कड़ी निंदा की है व इसे राज्य द्वारा प्रायोजित तानाशाही करार दिया है। सीटू राज्य कमेटी ने ऐलान किया है कि इस मुद्दे पर सीटू युवाओं के प्रदेशव्यापी आंदोलन को समर्थन देगा व उनके प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर भाग लेगा। 

प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन के हमीरपुर में किये गए युवाओं व सीटू नेताओं के दमन व गिरफ्तारी के विरोध में सीटू राज्य कमेटी ने डीसी ऑफिस शिमला पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में विजेंद्र मेहरा,जगत राम,बालक राम,विनोद बिरसांटा,हिमी देवी,किशोरी ढटवालिया,रमन थारटा,अनिल ठाकुर,बंटी ठाकुर,विवेक राज़,अंकुश,उपेंद्र,अंकुश,सुरेंद्र बिट्टू,पवन शर्मा,राकेश सलमान,रंजीव कुठियाला,राम प्रकाश,पूर्ण चंद,राकेश कुमार,विनीत,विक्रम सिंह,सतपाल बिरसांटा,कपिल नेगी,वीरेन्द्र नेगी,शांति देवी,श्याम लाल आदि मौजूद रहे।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा,महासचिव प्रेम गौतम व उपाध्यक्ष जगत राम ने हमीरपुर में किये गए पुलसिया दमन को तानाशाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्वक प्रदर्शनों का दमन,उनको तितर-बितर करना व गिरफ्तारियां करना केंद्र व प्रदेश सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार सेना भर्ती के मामले पर युवाओं से लगातार छलावा कर रही है। वर्ष 2020 से ही सेना भर्ती बन्द है व इस दौरान देश के लगभग डेढ़ लाख युवा सेना भर्ती से वंचित हुए हैं। देश के लाखों युवा पिछले तीन वर्षों से सेना भर्ती की मांग कर रहे हैं परन्तु देशभक्त व राष्ट्रभक्त होने का नाटक करने वाली केंद्र सरकार ने नियमित सेना भर्ती करने के बजाए भारतीय सेना को भी संविदाकरण,ठेकाकरण व फिक्स टर्म रोज़गार के हवाले कर दिया है। केंद्र सरकार का यह कदम युवा व देश विरोधी है। इस से सेना की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा व उसका मनोबल कमज़ोर होगा। इस कदम से सेना में अपनी सेवाएं देने की आस लगाकर बैठे लाखों युवाओं के नियमित रोज़गार व सामाजिक सुरक्षा के सपने ध्वस्त हो गए हैं। अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्ती होने वाले जवानों को सेवानिवृति पर पेंशन व ग्रेच्युटी भी नहीं मिलेगी। चार वर्ष की नौकरी के बाद महज़ 22 वर्ष की उम्र ये युवा जवान बेरोजगार हो जाएंगे व उनका भविष्य अनिश्चितताओं से भरा रहेगा। उन्हें चार साल की नौकरी के बाद केवल ग्यारह लाख का भुगतान करके उनकी सामाजिक सुरक्षा पर सरकार ने प्रश्न चिन्ह लगा दिया है जबकि नियमित रोज़गार के दौरान सेवानिवृत्ति पर यह राशि इसके मुकाबले कई गुणा ज़्यादा होनी थी। अगर ये जवान अग्निवीर के बजाए नियमित जवान के रूप में भर्ती होते तो सेवानिवृति के समय में न केवल पेंशन व ग्रेच्युटी के हकदार होते अपितु अपने सम्पूर्ण जीवनकाल में सम्मानजनक वेतन हासिल करते। नवउदारवादी नीतियों के प्रभाव से अब तक लगभग मुक्त रही सेना को भी केंद्र सरकार ने नहीं बख्शा है। यह सरकार जवानों के साथ आर्थिक भ्रष्टाचार भी कर रही है। चार वर्ष के रोज़गार की आड़ में सेना के नियमित डेढ़ लाख रोजगारों को खत्म करने की पटकथा लिखी जा चुकी है। देश के अन्य कर्मचारियों की तर्ज़ पर सेना में पेंशन को खत्म करने का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। देश में श्रम कानूनों को खत्म करके बनाए गए लेबर कोडों के तहत ठेकाकरण,संविदाकरण व फिक्स टर्म रोज़गार का सिद्धांत सबसे पहले देश के प्रहरियों पर लागू करने की योजना बन चुकी है। केंद्र सरकार इस से पहले भी भारतीय सेना के निजीकरण व निगमीकरण को अमलीजामा पहुंचाने का कार्य कर चुकी है। उसने पहले आयुद्ध कारखानों का निजीकरण करने की कोशिश की और जब आयुद्ध कारखानों के कर्मचारियों ने सरकार के इस कदम का विरोध किया तो सरकार इसके निगमीकरण की ओर आगे बढ़ गयी। अग्निपथ योजना के ज़रिए अग्निवीर जवानों की भर्ती इसका ही अगला कदम है। यह नियमित रोज़गार को खत्म करने की साज़िश है तथा देश की सुरक्षा से समझौता है जिसे सीटू कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

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